Aag Se Khelna Shayari
वादा करके वो निभाना भूल जाते हे, लगाकर आग वो बुझाना भूल जाते हे ऐसी आदत लग गई हे उसको, की रुलाते हे मगर मनाना भूल जाते हे ये सीने की आग है, यहाँ पानी का क्या काम? किया हमने महज इश्क़ था, कमबख्त किस्मत ही निकली बेईमान ना करो किसी से नफ़रत, नफ़रत आग लगा देती है प्यार की एक बूँद बड़ी से बड़ी आग बुझा देती है कोयले से जलाई हुई आग थोड़ी देर बाद बुझ जाती है लेकिन शब्दों से लगी आग की उम्र बहुत ज्यादा होती है आग लगी दिल में जब वो खफ़ा हुए, एहसास हुआ तब, जब वो जुदा हुए करके वफ़ा वो हमे कुछ दे न सके, लेकिन दे गये बहुत कुछ जब वो वेबफा हुए डरते हे आग से कही हम जल न जाये , डरते हे अपने ख़्वाब से कही टूट न जाये पर सबसे ज्यादा डरते हे हम आप से, कही आप हमें भूल न जाये जिनके दिलों में नफरत हो, उनकी जुबान सिर्फ आग हीं उगलती है लेकिन मन का मैल धोये बिना, जिंदगी में खुशियाँ कहाँ खिलती है कुछ लोग सितम करने को तैयार बैठे है, कुछ लोग हम पर दिल हार बैठे है इश्क को आग का दरिया ही समझ लीजिये, कुछ इस पार तो कुछ उस पार बैठे हैं कभी – कभी उदासी की आग हे ज़िन्दगी , कभी – कभी खुशियों का बाग़ हे ज़िन्दगी हँसता और रुलाता राग ...